श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 3 : Aranyakand • अध्याय HtYptGhBLibwXnCozgTV
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मरणासन्न मारीच के मुख से निकली वह करुण कपट-पुकार हवा के वेग के साथ पञ्चवटी आश्रम तक पहुँच गई। आश्रम में पुष्प वाटिका के पास खड़ी सीता जी ने जब अपने पति के स्वर से मिलती-जुलती वह पुकार सुनी, तो उनका हृदय काँप उठा। वे अत्यंत भयभीत और व्याकुल हो उठीं।
