श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 3 : Aranyakand • अध्याय U72rhG3vPXX3G6c4sEaF
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मारीच ने नीतिपूर्ण वचन कहते हुए रावण को समझाया कि अप्रिय किंतु हितकारी सत्य कहने और सुनने वाले दुर्लभ होते हैं।

मारीच ने नीतिपूर्ण वचन कहते हुए रावण को समझाया कि अप्रिय किंतु हितकारी सत्य कहने और सुनने वाले दुर्लभ होते हैं।