श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 3 : Aranyakand • अध्याय is2J0GIZcAUqjt3zuHZh
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पक्षिराज जटायु का विधिवत दाह-संस्कार और तर्पण संपन्न करने के पश्चात श्रीराम और लक्ष्मण दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़े। वे दोनों वीर धनुष, बाण और खड्ग धारण किए हुए ऐसे दुर्गम मार्ग पर पहुँचे जहाँ जनसाधारण का आवागमन नहीं होता था। वह मार्ग घने वृक्षों, झाड़ियों और लताओं से घिरा हुआ था। गहन वन की दुरूहता को पार करते हुए वे जनस्थान से तीन कोस दूर विख्यात क्रौञ्चारण्य वन में प्रविष्ट हुए।
