पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण की बसाई हुई नगरी द्वारिका का अंत किसी प्राकृतिक आपदा मात्र से नहीं, बल्कि श्रापों के एक जाल और यादवों के अहंकार के कारण हुआ था। यह कहानी शक्ति के पतन और समय के चक्र की एक मार्मिक सीख है। कथा की शुरुआत तब होती है जब द्वारिका अपने वैभव के चरम पर थी। एक दिन महर्षि विश्वामित्र, कण्व और देवर्षि नारद द्वारिका पधारे। कृष्ण के पुत्र साम्ब और उनके मित्रों ने ऋषियों के साथ उपहास करने की सोची। साम्ब को स्त्री के वेश में सजाया गया और उसके पेट पर एक मूसल (लोहे का यंत्र) बांध दिया गया। वे ऋषियों के पास गए और पूछा, "हे ऋषिवर, यह स्त्री गर्भवती है, बताइए इसके गर्भ से क्या उत्पन्न होगा? " ऋषियों ने अपने तपोबल से इस अपमान को जान लिया और क्रोधित होकर श्राप दिया: "इसके गर्भ से एक ऐसा लोहे का मूसल पैदा होगा, जो पूरे यदुवंश के विनाश का कारण बनेगा।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 29 • कथा 43JzEPjYejrc0U1jmUIt
1 / 4
