कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 29 • कथा 9etG9vsJZRjnulJAEcd0
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महाराष्ट्र के पंढरपुर में संत नामदेव जी भगवान विट्ठल (श्री कृष्ण) के अनन्य उपासक थे। एक बार नामदेव जी के मन में यह तीव्र इच्छा जाग्रत हुई कि वे साक्षात भगवान को अपने घर ले जाएँ और अपनी माता के हाथों का बना भोजन कराएं। नामदेव जी मंदिर के गर्भगृह में जाकर भगवान की मूर्ति के सामने बैठ गए और हठ करने लगे— "प्रभु! आज आपको मेरे साथ घर चलना ही होगा। मैया ने बड़े प्रेम से आपके लिए भोजन बनाया है। " भगवान तो भाव के भूखे हैं। नामदेव का प्रेम इतना निश्छल था कि साक्षात विट्ठल देव मूर्ति से प्रकट हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा— "नामदेव! यदि मैं तुम्हारे साथ चला गया, तो मंदिर में मेरे दर्शन करने आने वाले भक्तों का क्या होगा?
