कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 29 • कथा 9kwMfKXarhzqfZkute3u
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मधुकर शाह और उनकी पत्नी गणेशकुंवरि को साक्षात दशरथ और कौशल्या का अवतार माना जाता है। त्रेता युग में राजा दशरथ अपने पुत्र श्रीराम का राज्याभिषेक नहीं कर सके थे; उनकी यह अधूरी अभिलाषा कलियुग में ओरछा में पूर्ण हुई। रामराजा के अयोध्या से ओरछा आगमन की यह कथा अत्यंत मनोहारी और आस्था से परिपूर्ण है। एक दिन ओरछा नरेश मधुकर शाह ने कृष्ण उपासना के उद्देश्य से अपनी पत्नी गणेशकुंवरि से वृंदावन चलने का आग्रह किया। किंतु रानी श्रीराम की अनन्य भक्त थीं। उन्होंने वृंदावन जाने से इनकार कर दिया। क्रोधावेश में राजा ने उनसे कहा कि यदि तुम इतनी बड़ी राम भक्त हो तो जाकर अपने राम को ओरछा ले आओ। रानी अयोध्या पहुँचीं और सरयू नदी के तट पर लक्ष्मण किले के निकट एक कुटिया बनाकर तपस्या आरंभ की।
