कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 29 • कथा I5VEveZBl0aNY0dx77C3
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पुराने समय की बात है एक आश्रम में बहुत से शिष्य रहते थे और वह सब आपस में बातें किया करते थे कि मुझे आज ऐसा अनुभव हुआ, कोई कहता मुझे इस तरह का अनुभव हुआ, हर कोई अपने-अपने अनुभव आपस में शेयर किया करते थे, जिसमें एक शिष्य ऐसा भी था जिसे कोई अनुभव हुआ ही नहीं था, उसने सोचा मेरा जीवन क्या ऐसे ही व्यर्थ हुआ, सबको कुछ ना कुछ अनुभव होता है मुझे कोई अनुभव क्यों नहीं होता, क्या आश्रम में मेरा समय नष्ट जा रहा है, यही सब सोच कर उसने अपने गुरु जी से पूछा कि गुरुवर आश्रम में सभी को कुछ ना कुछ अनुभव होता है तो मुझे क्यों नहीं होता, क्या मेरी तपस्या में मेरी साधना में कोई कमी रह गई है ?
