एक सुबह, सम्राट अकबर झरोखे से नीचे देख रहे थे। उनकी नज़र एक फटे-हाल ब्राह्मण पर पड़ी जो राहगीरों के सामने हाथ फैलाकर भिक्षा मांग रहा था। अकबर ने व्यंग्य से बीरबल की ओर देखा और कहा— "बीरबल! देखो अपने इन देवताओं को! तुम तो कहते हो कि ब्राह्मण 'ब्रह्म' का रूप है, लेकिन ये तो दो कौड़ी के सिक्कों के लिए इंसानों के आगे हाथ फैला रहा है। " बीरबल ने मौन साध लिया। उन्होंने जान लिया था कि आज सम्राट को केवल तर्क से नहीं, बल्कि ईश्वर के साक्षात् चमत्कार से उत्तर देना होगा। भिखारी से साधक की यात्रा बीरबल उस ब्राह्मण के पास गए और बोले— "पंडित जी, कल से आप भिक्षा मांगना छोड़ दें। आप केवल गायत्री मंत्र का जाप करें। इसके बदले मैं आपको प्रतिदिन 10 अशर्फियाँ दूँगा। " ब्राह्मण के लिए यह एक सौदा था। उसने सोचा— "मज़े की बात है! भगवान का नाम भी लो और पेट भी भरो। " वह अगले दिन से एक पुराने वटवृक्ष के नीचे बैठकर जाप करने लगा।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 29 • कथा jeuSpKL8KtnVZzmndLkk
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