Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 33
पौराणिक कथाएँ 33
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 33 • कथा LPfhrCq95MXRFsD1ZXlZ
1 / 4

नामदेव जी गोरा कुम्हार जी के यहाँ बैठे हुए थे। बड़े-बड़े महापुरुष भी वहाँ थे। मुक्ताबाई जी भी वहाँ थीं। उन्होंने गोरा जी से कहा काका इन मटकियों में से कौन सी मटकी कच्ची है, मैं अभी बताती हूँ। बड़े-बड़े संत वहाँ बैठे थे, सब मुस्कुरा दिये। उन्होंने नामदेव जी के सर पर मारा (जैसे एक कुम्हार मटकी को ठोक कर देखता है कि वो कच्ची है या पक्की), तो उन्होंने कहा हटिए, ये क्या कर रहीं हैं आप? मुक्ताबाई जी ने कहा काका ये मटकी कच्ची है, बोल जो पड़ी। सब संतों ने भी हँस कर कह दिया कि हाँ, सच में कच्ची है। नामदेव जी ने सोचा कि ठाकुर जी का दर्शन और साक्षात्कार ही एक मात्र सत्य है, और ठाकुर जी तो रोज़ मेरे साथ खेलते हैं और खाते हैं, फिर मैं कैसे कच्चा हूँ? वो सीधा भगवान विठ्ठल जी के पास गए और कहा कि सबसे बड़ी सिद्ध अवस्था यही है कि भगवान भक्त से बात करें और आप तो मेरे साथ खेलते हो, फिर उन संतों ने ऐसा क्यों कहा कि मैं कच्चा हूँ, क्या में सच में कच्चा हूँ? ठाकुर जी ने भी बोल दिया कि हाँ आप अभी कच्चे हैं।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4