कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 3 • कथा PTXRiPGJRY6EbFp7dz1K
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ब्रज में एक गोपी रहती थी, जिसका नाम था 'सुखिया'। वह बेचारी बहुत गरीब थी, लेकिन उसका मन केवल कान्हा के चरणों में लगा रहता था। वह रोज जंगल से घास काटती, गायों की सेवा करती और कंडे (उपले) बनाकर उन्हें बेचती, जिससे उसका जीवन चलता था। एक दिन सुखिया गोपी नंद बाबा के आंगन के पास से गुजर रही थी। उसके सिर पर कंडों की टोकरी थी। तभी नन्हे बाल-कृष्ण (ठाकुर जी) दौड़ते हुए आए और गोपी का रास्ता रोक लिया। काले-कजरारे नैनों वाले लला ने बड़ी मासूमियत से कहा— "अरी गोपी!
