कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 30 • कथा axFcbBDw45M605mXciZx
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यह कहानी केवल भक्ति की नहीं, बल्कि उस अटूट संबंध की है जहाँ ईश्वर मूर्ति से निकलकर भक्त के प्राणों में बस जाते हैं। बिहार के एक छोटे से गाँव में एक पुराना मिट्टी का घर था, जिसकी दीवारें तो कच्ची थीं, पर वहाँ रहने वाली दुखिया माई का विश्वास बहुत पक्का था। माई के पास पीतल के एक छोटे से 'लड्डू गोपाल' थे, जिन्हें वह प्यार से 'लल्ला' पुकारती थी। गाँव वाले अक्सर उन्हें देखकर मुस्कुराते, क्योंकि माई अपने लल्ला से वैसे ही बातें करती जैसे कोई माँ अपने अबोध बालक से करती है। वह उन्हें नहलाती, नए वस्त्र पहनाती और सबसे पहले भोग लगाकर ही खुद कुछ खाती। माई के लिए वह कोई धातु की मूर्ति नहीं, बल्कि उनके घर का सबसे लाडला सदस्य था।
