कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 30 • कथा iNGFD9wRkEVUu2GMCAx7
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नामाचार्य श्री हरिदास ठाकुर की यह कथा केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि भक्ति की पराकाष्ठा का प्रमाण है। जब नवाब के आदेश पर हरिदास ठाकुर को २२ बाज़ारों में बेरहमी से पीटा जा रहा था, तब वे केवल 'हरे कृष्ण' नहीं जप रहे थे, बल्कि वे भगवान से उन जल्लादों के लिए क्षमा मांग रहे थे। कहा जाता है कि जब जल्लाद थक गए और उन्हें डर लगा कि नवाब उन्हें मार डालेगा क्योंकि हरिदास मर नहीं रहे थे, तब हरिदास जी ने स्वयं को समाधि की अवस्था में डाल लिया ताकि सैनिकों को लगे कि वे मृत हैं और उनकी जान बच जाए।
