कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 38 • कथा JJFiwfkwTsyi6dTEWCac
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भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की यह कथा अहंकार के विनाश और सच्ची भक्ति की महिमा को दर्शाती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि श्रद्धा के सामने भौतिक संपत्ति का कोई मूल्य नहीं है। अहंकारी कुबेर और बालक गणेश 1. कुबेर का अहंकार कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी माने जाते थे। उनके पास स्वर्ण की लंका और बेशुमार संपत्ति थी। धीरे-धीरे उन्हें अपनी इस दौलत पर अहंकार हो गया। वे अपनी शक्ति और वैभव का प्रदर्शन करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक विशाल 'महाभोज' (दावत) का आयोजन किया, जिसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया। कुबेर कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती को निमंत्रण देने पहुँचे। भगवान शिव कुबेर के मन का अहंकार समझ गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "कुबेर, मैं और पार्वती तो नहीं आ पाएंगे, लेकिन मेरा पुत्र गणेश तुम्हारी दावत में जरूर आएगा।
