कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 38 • कथा qnCRE4c9zN2yHxkT6L5r
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अर्धकुंवारी गुफा का आध्यात्मिक महत्व और भैरव नाथ की मुक्ति का प्रसंग अर्धकुंवारी: नौ महीने का गर्भवास जब माता वैष्णवी (त्रिकुटा) भैरव नाथ से बचते हुए त्रिकुटा पर्वत की ओर बढ़ रही थीं, तब वे एक संकरी गुफा में प्रविष्ट हुईं। इस स्थान को आज 'अर्धकुंवारी' कहा जाता है। * अध्यात्म का गर्भ: माता इस गुफा में पूरे नौ महीने तक उसी प्रकार तपस्या में लीन रहीं, जैसे एक शिशु अपनी माता के गर्भ में रहता है। इसीलिए इस गुफा को 'गर्भजून' भी कहा जाता है। * हनुमान जी का पहरा: इस पूरी अवधि के दौरान, वीर हनुमान गुफा के बाहर पहरा दे रहे थे। जब भैरव नाथ वहां पहुंचा और अंदर घुसने की कोशिश की, तो हनुमान जी ने उसे ललकारा और दोनों के बीच घोर युद्ध हुआ।
