कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 38 • कथा sKvLxlUOwQID6SmTTuZQ
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श्री हरेराम बाबा जब महामंत्र का कीर्तन करते तब उनको प्रेम आवेश होता और भगवान की साक्षात अनुभूति होती थी एक नीलवर्ण की कांति (प्रकाश) दिखाई पड़ती और उसीमे श्रीकृष्ण का दर्शन उनको होता । उसीको पकड़ने के लिए बाबा उसके पीछे पीछे भागते और फिर कुछ देर बाद उन्हें मूर्छा आ जाती । उनका शरीर कांपने लगता और बाद मे साधारण स्तिथि हो जाती । एक बार बाबा श्री गणेशदास जी, पुजारी श्री रामचंद्रदास जी और श्री हरेराम बाबा यह ३ संत पैदल जगन्नाथ पूरी दर्शन करने के लिए निकले । रास्ते मे कीर्तन करते करते श्री हरेराम बाबा को प्रेमावेश हुआ और पास ही के एक गन्ने के सघन खेत को ३ मील तक चिरते हुए वे पार हो गए । सम्पूर्ण शरीर रक्त से भर गया , घंटो मूर्छित अवस्था मे रहे । ऐसा रास्ते मे कई बार हुआ और बहुत दिनों के बाद वे संत जगन्नाथ पूरी पहुंचे ।
