कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 26 • कथा UVEsKPBkmYPvelKM0mkx
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डोंगरे जी महाराज, जिन्हें उनके सरल और भक्तिपूर्ण स्वभाव के लिए जाना जाता था, एक दिन भागवत कथा के दौरान 'भक्ति में विश्वास' विषय पर चर्चा कर रहे थे। पंडाल हजारों श्रद्धालुओं से खचाखच भरा था। हर कोई उनकी अमृतवाणी को सुनने के लिए आतुर था। महाराज जी ने जब अपनी कथा शुरू की, तो उनकी आवाज़ में एक अनोखी गूँज थी। डोंगरे जी महाराज ने एक छोटे से गाँव में रहने वाली एक बेहद गरीब विधवा की कहानी सुनाई। उसका सारा संसार उसका एकलौता बेटा था। घर में खाने को कुछ नहीं था, लेकिन उसके मन में भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा थी। वह हर सुबह एक टूटे हुए मिट्टी के दीये के सामने बैठती और आँखें बंद करके जपती — “हे प्रभु, मुझे नहीं पता आप कब आओगे, पर मैं आपका इंतजार करूँगी।
