कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 26 • कथा yiNJVIn2qE49kqTCAbRj
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जीवन में जो बिना मांगे मिलता है, वह पिछले जन्मों का संचित पुण्य है, भारतीय दर्शन और कर्म सिद्धांत की गहरी जड़ों से जुड़ा है। इसे समझने के लिए संत एकनाथ के जीवन की एक बहुत ही सुंदर और प्रचलित कहानी है, जो 'अदृश्य ऋण' और 'संचित पुण्य' के प्रभाव को बखूबी दर्शाती है। महाराष्ट्र के महान संत एकनाथ जी भगवान के अनन्य भक्त थे। वे अत्यंत दयालु और शांत स्वभाव के थे। उनके जीवन की यह घटना हमें बताती है कि कैसे हमारे पुण्य कर्म ईश्वर को भी हमारा ऋणी बना देते हैं।
