श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand • अध्याय 3QNfWZZxb6HftLCSz5qc
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मंत्रियों और अंगद की बात सुनकर सुग्रीव का नशा उतर गया और वे भयभीत होकर अपने सिंहासन से उठ खड़े हुए। सुग्रीव ने व्याकुल होकर विचार किया कि उन्होंने जान-बूझकर कोई अपराध नहीं किया है, फिर लक्ष्मण जी इतने कुपित क्यों हैं। सुग्रीव ने शंका व्यक्त की कि कहीं शत्रुओं ने श्रीराम और लक्ष्मण के कान तो नहीं भरे हैं। सुग्रीव ने कहा कि उपकार का बदला न चुका पाने का भय मुझे निरंतर सता रहा है क्योंकि श्रीराम का उपकार असीम है।
