श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand • अध्याय 3sNAuw2TlavWWs5rvMAV
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श्रीरामचंद्र जी के वचनों से परम उत्साह प्राप्त करके वानरराज सुग्रीव अपने सहायकों के साथ पुनः किष्किन्धापुरी के मुख्य द्वार पर पहुँचे। श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी सघन वन में विशाल वृक्षों की ओट में छिपकर खड़े हो गए। सुग्रीव के कंठ में लक्ष्मण जी द्वारा पहनाई गई गजपुष्पी लता की श्वेत पुष्पमाला अत्यंत शोभा पा रही थी। श्रीराम ने सुग्रीव को आश्वस्त करते हुए कहा कि आज वे एक ही बाण से वाली के भय को समाप्त कर देंगे। श्रीराम ने सुग्रीव को पुनः सिंहगर्जना करने की आज्ञा दी।
