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Ramayana Part 4 : Kishkindhakand
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand • अध्याय 5Axj4EB9s9Sr0M5ZcEwu
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श्रीराम के दिव्य बाण से आहत होकर महाबली वाली कटे हुए वृक्ष के समान पृथ्वी पर पड़ा हुआ था। उसके गले में देवराज इंद्र द्वारा दी गई रत्नजड़ित सुवर्णमाला अब भी दिव्य कांति बिखेर रही थी। उस अलौकिक माला के प्रभाव से वाली के प्राण और तेज उसके शरीर में स्थिर बने हुए थे। श्रीराम और लक्ष्मण अत्यंत आदरभाव से उस वीर के समीप पहुँचे। श्रीराम को अपने सम्मुख खड़ा देखकर मरणासन्न वाली ने धर्म और नीति से युक्त किंतु अत्यंत कठोर वाणी में आक्षेप करना आरंभ किया।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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