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Ramayana Part 4 : Kishkindhakand
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand • अध्याय DsGm9lSawayEv39mxuy9
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ऋक्षबिल की गुफा से बाहर निकलने के पश्चात जब वानरों ने देखा कि सुग्रीव द्वारा नियत की गई एक मास की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, तो उन पर घोर निराशा छा गई। वानर तार ने सुझाव दिया कि वे सब पुनः स्वयंप्रभा की उस अभेद्य गुफा में जाकर छिप जाएं। तार के इस विचार को सुनकर बुद्धिमान पवनपुत्र हनुमान जी अत्यंत चिंतित हो उठे। हनुमान जी ने विचार किया कि यदि वानरों में फूट पड़ गई और वे गुफा में छिप गए, तो श्रीराम का कार्य सदा के लिए नष्ट हो जाएगा और वानर समाज का विनाश हो जाएगा।

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