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Ramayana Part 4 : Kishkindhakand
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand • अध्याय Xz65kXsVGWGni3qHuzxt
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प्रस्रवण पर्वत पर विराजमान भगवान श्रीरामचंद्र जी ने जब सुग्रीव के विशाल सैन्य-उद्योग को देखा, तो वे अत्यंत आनंदित हुए। श्रीराम ने अपनी दोनों भुजाओं से वानरराज सुग्रीव का गाढ़ आलिंगन किया। श्रीराम ने कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि हे सखे, जैसे सूर्य अंधकार दूर करते हैं और मेघ जल बरसाते हैं, वैसे ही मित्रों का उपकार करना तुम्हारा स्वाभाविक गुण है। तुम्हारी इस असीम सहायता से सनाथ होकर मैं अवश्य ही रावण सहित समस्त राक्षसों का संहार करूँगा। रावण ने जानकी का हरण करके अपने विनाश को स्वयं निमंत्रित किया है।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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