श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 4 : Kishkindhakand • अध्याय qMDsBt8GfbTrOe9fDFl1
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युवराज अंगद के आह्वान पर वानर वीरों ने अपनी-अपनी छलांग लगाने की क्षमता का वर्णन करना आरंभ किया। गज ने कहा कि वे दस योजन कूद सकते हैं। गवाक्ष ने बीस योजन, शरभ ने तीस योजन, ऋषभ ने चालीस योजन, गंधमादन ने पचास योजन, मैन्द ने साठ योजन, द्विविद ने सत्तर योजन तथा सुषेण ने अस्सी योजन तक छलांग लगाने का संकल्प व्यक्त किया। प्रत्येक वीर ने अपनी शक्ति की सीमा बताई, किंतु सौ योजन के संपूर्ण विस्तार को पार करना किसी के वश में नहीं जान पड़ रहा था।
