कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 31 • कथा 6If6gQKY2ZZ4FtHNMdwV
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यह प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन की सबसे अलौकिक और भावुक कर देने वाली घटनाओं में से एक है। इसका विस्तृत वर्णन 'भक्तमाल' (नाभादास जी द्वारा रचित) और प्रियादास जी की टीकाओं में मिलता है। तुलसीदास जी जब काशी के अस्सी घाट पर रहकर 'रामचरितमानस' की रचना कर रहे थे, तब स्थानीय कुछ लोग उनकी बढ़ती प्रसिद्धि से जलने लगे। उन्हें लगा कि एक साधारण व्यक्ति संस्कृत के बजाय लोकभाषा (अवधी) में रामायण लिखकर सनातन धर्म का अपमान कर रहा है। उन्होंने पहले तो ग्रंथ को नीचा दिखाने की कोशिश की, लेकिन जब सफल नहीं हुए तो उन्होंने दो पेशेवर चोरों को मानस की मूल प्रति चुराने के लिए भेजा। आधी रात का समय था।
