एक पंडित जी कई वर्षों तक काशी में रहकर वेदों और शास्त्रों का गहन अध्ययन करते रहे। समय के साथ उन्हें सभी शास्त्रों का अच्छा ज्ञान हो गया। अब उन्हें लगने लगा कि वे अपने गाँव के सबसे बड़े विद्वान बन चुके हैं। इस ज्ञान के साथ उनके भीतर धीरे-धीरे अहंकार भी उत्पन्न हो गया। एक दिन वे अपने गाँव लौटे। गाँव पहुँचते ही एक किसान ने उनसे पूछा— “पंडित जी, क्या आप बता सकते हैं कि हमारे समाज में लोग दुखी क्यों रहते हैं? ” पंडित जी ने उत्तर दिया— “लोगों के पास जीवनयापन के पर्याप्त साधन नहीं होते। धन की कमी के कारण वे दुखी रहते हैं। ” किसान ने विनम्रता से कहा— “लेकिन पंडित जी, जिनके पास धन-दौलत है, वे भी तो दुखी रहते हैं। मेरे पास भी संपत्ति है, फिर भी मैं दुखी हूँ। ऐसा क्यों? ” पंडित जी इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सके। वे कुछ देर मौन रहे। तब किसान ने कहा— “यदि आप मेरे दुख का कारण बता दें, तो मैं अपनी सारी संपत्ति आपको दान कर दूँगा।
कथा प्रसंग 1
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