Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 31
पौराणिक कथाएँ 31
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 31 • कथा fS2TP8YSrQuoockUiSbg
1 / 4

एक बार एक जिज्ञासु भक्त ने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में बैठकर एक अत्यंत प्राचीन और जटिल प्रश्न पूछा— "हे माधव! मनुष्य के जीवन में बड़ा कौन है? उसका 'भाग्य' , जो पहले से लिखा जा चुका है, या उसका 'पुरुषार्थ' , जो वह आज कर रहा है? यदि सब कुछ भाग्य में लिखा है, तो कर्म क्यों करें? और यदि कर्म ही सब कुछ है, तो भाग्य की चर्चा क्यों? " भगवान श्रीकृष्ण मंद-मंद मुस्कुराए। उन्होंने पास पड़ी हुई एक लंबी रस्सी उठाई। उन्होंने उस रस्सी का एक सिरा भक्त के दाहिने हाथ में दिया और दूसरा सिरा स्वयं अपने हाथ में पकड़ लिया।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4