श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 2 : Sabhaparva • अध्याय 12a8Oirqpcuo44mB1Dz4
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जरासंध के वध और बंदी राजाओं की मुक्ति के उपरांत धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसूय महायज्ञ के सफल आयोजन के लिए चारों दिशाओं में विजय अभियान चलाने का निश्चय किया। उन्होंने अपने चारों पराक्रमी भाइयों को विभिन्न दिशाओं का दायित्व सौंपा। युधिष्ठिर ने उन्हें धर्मपूर्वक विजय प्राप्त करने और राजाओं से केवल कर व मैत्री स्वीकार करने का निर्देश दिया। चारों भाइयों ने बड़े उत्साह के साथ अपनी-अपनी सेनाओं को सुसज्जित किया।
