इस द्वितीय पर्व में मय दानव द्वारा निर्मित दिव्य सभा, युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ, शिशुपाल वध, शकुनि का कपट द्यूत, द्रौपदी चीरहरण तथा पाण्डवों को बारह वर्ष वनवास और एक वर्ष अज्ञातवास का आदेश वर्णित है।
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