श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 11 : Striparva • अध्याय CyAvaZXyWRljV9urgRyk
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महर्षि व्यास की अनुकंपा से महारानी गांधारी को अलौकिक दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई, जिससे वे संपूर्ण कुरुक्षेत्र रणभूमि के यथार्थ को अपनी आंखों की पट्टी के भीतर ही साक्षात देखने में समर्थ हो गईं। जब पांडव, धृतराष्ट्र और हस्तिनापुर की समस्त कुलवधुएं रणक्षेत्र में पहुंचीं, तो वहां का दृश्य अत्यंत भयावह और हृदयविदारक था। चारों ओर टूटे हुए रथ, मृत गजराज, अश्व तथा असंख्य शूरवीरों के पार्थिव शरीर बिखरे पड़े थे। गांधारी भगवान श्रीकृष्ण का हाथ थामकर उस दारुण श्मशान भूमि में आगे बढ़ीं।
