इस एकादश पर्व में युद्ध में मारे गए वीरों के लिए धृतराष्ट्र, गांधारी और द्रौपदी आदि नारियों का करुण विलाप, गांधारी द्वारा श्रीकृष्ण को शाप तथा समस्त वीरों का श्राद्ध-तर्पण वर्णित है।
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