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Mahabharata Part 17 : Mahaprasthanikaparva
Mahabharata Part 17 : Mahaprasthanikaparva
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 17 : Mahaprasthanikaparva • अध्याय 3e7tXMFzn6sccw5DUdkx
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मेरु पर्वत के सर्वोच्च शिखर पर जब धर्मराज युधिष्ठिर अपने निष्ठावान श्वान के साथ अकेले आगे बढ़ रहे थे, तभी दसों दिशाओं में एक दिव्य नाद गूँज उठा। संपूर्ण आकाश और पृथ्वी उस अलौकिक ध्वनि से प्रतिध्वनित होने लगी। बादलों को चीरते हुए देवराज इंद्र का अत्यंत देदीप्यमान और सूर्य के समान प्रकाशमान दिव्य रथ उतर आया। स्वर्ग के अधिपति इंद्र ने रथ पर विराजमान होकर युधिष्ठिर का अभिनंदन किया।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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