इस सप्तदश पर्व में परीक्षित को राज्य सौंपकर पाण्डवों और द्रौपदी का सशरीर स्वर्गारोहण हेतु महाप्रस्थान, मार्ग में द्रौपदी व चार भाइयों का पतन तथा धर्मराज युधिष्ठिर का श्वान सहित हिमालय गमन वर्णित है।
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