श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 10 : Sauptikaparva • अध्याय 6FM1WE9fcRrAEkN9btiF
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रात्रि का भयानक अंधकार समाप्त होते ही धृष्टद्युम्न का एकमात्र जीवित बचा सारथी कांपते हुए राजा युधिष्ठिर के शिविर में पहुँचा। उसने हाथ जोड़कर और अश्रु बहाते हुए संपूर्ण रात्रि के भीषण संहार का समाचार सुनाया। उसने बताया कि निद्रा में मग्न सेनापति धृष्टद्युम्न, शिखंडी, द्रौपदी के पांचों पुत्रों और समस्त अक्षौहिणी सेना का अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा ने निर्ममता से वध कर दिया है। यह अमंगलकारी और हृदयविदारक समाचार सुनते ही धर्मराज युधिष्ठिर अचेत होकर भूमि पर गिर पड़े। उनके चारों भाइयों और सात्यकि ने अत्यंत व्याकुल होकर उन्हें संभाला।
