इस दशम पर्व में अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा द्वारा सोए हुए पाण्डव वीरों और द्रौपदी के पांचों पुत्रों का संहार, ब्रह्मास्त्र का प्रयोग तथा अश्वत्थामा की मणि का निष्कासन वर्णित है।
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