इस पंचम पर्व में दोनों पक्षों द्वारा सेनाओं का एकत्रीकरण, विदुर नीति, सनत्सुजात उपदेश, भगवान श्रीकृष्ण का शांतिदूत बनकर हस्तिनापुर गमन, कर्ण-कुंती संवाद तथा महायुद्ध की अंतिम तैयारी वर्णित है।
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