इस अष्टादश पर्व में युधिष्ठिर का देवदूत के साथ नरक-दर्शन, अंतिम परीक्षा, गंगा स्नान कर दिव्य देह धारण, स्वर्ग में भगवान श्रीकृष्ण, भाइयों व कौरवों से मिलन तथा महाभारत ग्रन्थ का पावन महात्म्य वर्णित है।
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