इस पञ्चदश पर्व में महाराज धृतराष्ट्र, महारानी गांधारी और माता कुंती का वन-गमन, आश्रम में तपस्या, महर्षि व्यास द्वारा परलोकवासी वीरों का दर्शन तथा वन के दावानल में उनका देहत्याग वर्णित है।
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